The (श्री शिवलीलामृत) is a revered devotional text originally composed in Marathi by the saint-poet Shridhar Swami Nazarekar in 1718. It consists of 14 or 15 chapters and is based on the Brahmottara Khanda of the Skanda Purana.
शिवलीलामृताची लोकप्रियता इतकी आहे की कालांतराने याचे अनेक भाषांतर प्रकार झाले आहेत. व्यतिरिक्त गुजराती, कन्नड, तेलुगू तसेच इंग्रजी भाषेत देखील हा ग्रंथ उपलब्ध आहे. यामुळे भारतातील विविध राज्यांतील भाविकांना आपल्या सोयीच्या भाषेत शिवतत्त्वाचा बोध घेता येतो.
इस अध्याय में शिव पूजा की पौराणिक विधियों और भक्तों की अटूट श्रद्धा की कहानियां हैं।
शिवलीलामृत भगवान शिव की महिमा, उनके अवतारों और उनकी असीम कृपा का वर्णन करने वाला एक अत्यंत पवित्र और चमत्कारी ग्रंथ है। मूल रूप से मराठी भाषा में रचित यह ग्रंथ अपनी सरल भाषा और गहरे आध्यात्मिक प्रभाव के कारण करोड़ों भक्तों का मार्गदर्शन करता आ रहा है। हिंदी भाषी भक्तों की सुविधा के लिए अब इंटरनेट पर व्यापक रूप से उपलब्ध है, जिससे लोग इस दिव्य ग्रंथ का लाभ अपनी सुविधानुसार उठा सकते हैं। शिवलीलामृत क्या है?
आज या लेखात आपण पाहणार आहोत.
Consists of 14 chapters (Adhyayas) and 2,453 couplets (Ovis).
इस ग्रंथ का पूर्ण लाभ उठाने के लिए भक्तों को कुछ नियमों का पालन करना चाहिए:
की रचना महाराष्ट्र के महान संत-कवि श्रीधर स्वामी नाझरेकर ने की थी। उनका जन्म सन् 1658 में सोलापुर जिले के नाझरे गाँव में हुआ था। यह वही युग था, जब संत तुकाराम, संत एकनाथ और संत ज्ञानेश्वर ने भक्ति-साहित्य से पूरे महाराष्ट्र को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया था।
The (श्री शिवलीलामृत) is a revered devotional text originally composed in Marathi by the saint-poet Shridhar Swami Nazarekar in 1718. It consists of 14 or 15 chapters and is based on the Brahmottara Khanda of the Skanda Purana.
शिवलीलामृताची लोकप्रियता इतकी आहे की कालांतराने याचे अनेक भाषांतर प्रकार झाले आहेत. व्यतिरिक्त गुजराती, कन्नड, तेलुगू तसेच इंग्रजी भाषेत देखील हा ग्रंथ उपलब्ध आहे. यामुळे भारतातील विविध राज्यांतील भाविकांना आपल्या सोयीच्या भाषेत शिवतत्त्वाचा बोध घेता येतो.
इस अध्याय में शिव पूजा की पौराणिक विधियों और भक्तों की अटूट श्रद्धा की कहानियां हैं। shivlilamrut in hindi pdf
शिवलीलामृत भगवान शिव की महिमा, उनके अवतारों और उनकी असीम कृपा का वर्णन करने वाला एक अत्यंत पवित्र और चमत्कारी ग्रंथ है। मूल रूप से मराठी भाषा में रचित यह ग्रंथ अपनी सरल भाषा और गहरे आध्यात्मिक प्रभाव के कारण करोड़ों भक्तों का मार्गदर्शन करता आ रहा है। हिंदी भाषी भक्तों की सुविधा के लिए अब इंटरनेट पर व्यापक रूप से उपलब्ध है, जिससे लोग इस दिव्य ग्रंथ का लाभ अपनी सुविधानुसार उठा सकते हैं। शिवलीलामृत क्या है?
आज या लेखात आपण पाहणार आहोत. जब संत तुकाराम
Consists of 14 chapters (Adhyayas) and 2,453 couplets (Ovis).
इस ग्रंथ का पूर्ण लाभ उठाने के लिए भक्तों को कुछ नियमों का पालन करना चाहिए: shivlilamrut in hindi pdf
की रचना महाराष्ट्र के महान संत-कवि श्रीधर स्वामी नाझरेकर ने की थी। उनका जन्म सन् 1658 में सोलापुर जिले के नाझरे गाँव में हुआ था। यह वही युग था, जब संत तुकाराम, संत एकनाथ और संत ज्ञानेश्वर ने भक्ति-साहित्य से पूरे महाराष्ट्र को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया था।