Palitana 5 Chaityavandan In Hindi _best_ Full <95% Exclusive>

तृतीय चैत्य — तप का अभिवादन तृतीय चैत्य को नमन, तप-बल का अनंत स्वरूप। त्याग और संयम के पथ पर चलकर मिलती मुक्ति सुफल रूप॥ ॐ नमो तपोवनाय

पालीताना (शत्रुंजय महातीर्थ) की यात्रा में 5 मुख्य चैत्यवंदन

पर्वत शिखर पर स्थित श्री शांतिनाथ मंदिर। हिंदी पाठ: palitana 5 chaityavandan in hindi full

चालीस धनुष नी देहडी, समचोरस संस्थान,वदन पद्म ज्युं चांदलो, दीठे परम कल्याण। (३)

"शांति जिनेश्वर सोलमा, अचिरा सुत वंदो;विश्वसेन कुल नभोमणि, भविजन सुख कंदो।मृग लंछन जिन आउखु, लाख वरस प्रमाण;हत्थीणापुर नयरी धणी, प्रभुजी गुण मणि खाण।" वदन पद्म ज्युं चांदलो

भाव धरीने जे चढे, तेने भवपार उतारे।

यह चैत्यवंदन शत्रुंजय पर्वत की तलहटी (शुरुआत) में किया जाता है। अचिरा सुत वंदो

पालीताणा के केवल एक औपचारिकता नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि का एक वैज्ञानिक अभ्यास है। यह हमें सिखाता है कि जैसे हम पाँच बार झुकते हैं, वैसे ही हमें अपने अंदर के पाँच दोषों— क्रोध, अहंकार, छल, लोभ और अज्ञान— को बार-बार प्रणाम करके समाप्त करना है।

पालीताणा की 863 सीढ़ियाँ केवल शारीरिक तप नहीं, बल्कि आत्मा के उत्थान की सीढ़ियाँ हैं। यहाँ पाँच बार चैत्यवंदन करने की परंपरा और कुमारपाल के समय से प्रचलित है। ऐसी मान्यता है कि जो भक्त सच्चे मन से पाँच चैत्यवंदन करता है, उसे पाँचों इंद्रियों के विकारों से मुक्ति मिलती है।

यदि आप इस चैत्यवंदन की विधि को और अधिक विस्तार से समझना चाहते हैं, तो मुझे बताएं। मैं आपको इसके या भाव यात्रा के बारे में अधिक जानकारी दे सकता हूँ। Share public link